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फ़रवरी 21, 2011

माँ


हिमालय से ऊची है 'माँ'  किंतु पाषांड सी कठोर नही
सागर सी गहरी हैं 'माँ'  किंतु सागर सी खारी नही,
वायु सी गतिशील है 'माँ' किंतु वायु सी अदृश्य नही
परमेश्वर की जननी है 'माँ' किंतु परमेश्वर सी दुर्लभ नही,
माँ की कोई उपमा नही, क्यूकी माँ "उप - माँ" नही हो सकती.

2 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तम प्रस्तुति...

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