ज़िन्दगी की परिभाषा

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March 27, 2017

ज़िन्दगी की परिभाषा

क्या है ज़िन्दगी ?

क्या दौलत, शोहरत, रुतबा है ज़िंदगी,
क्या गाडी, बंगला, नौकर चाकर है ज़िन्दगी?

प्रश्न थोड़ा पेचीदा है पर उत्तर बेहद सरल
न दौलत, न शोहरत, न पैसा न रुतबा, हर पल में है ज़िन्दगी |

एक ऐसा पल जो हसाए, दो ऐसे पल जो रुलाये
एक पल जो जीने  का मतलब सिखाए यह है ज़िन्दगी |

सब चीज़ों से परिपूर्ण नहीं, सब चीज़ों में परिपूर्ण है ज़िन्दगी
आत्मसुख नहीं, आत्मअनुभव है ज़िन्दगी |

फूलो की खुसबू , पंछी की आवाज़, पत्तो की सरसराहट, नदी का बहाव,
ज़िन्दगी वो नहीं जो तुम बनाओ, ज़िन्दगी वो है जो तुम्हे बनाये |


(लेखक परिचय:  वैभव दुबे, बाल साहित्यकार)


5 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विश्व रंगमंच दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है।कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  2. बहुत ख़ूब ... ज़िंदगी जो तुम्हें बनाए ...

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  3. बेहद खूबसूरत जज्बात !

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  4. दिनांक 30/03/2017 को...
    आप की रचना का लिंक होगा...
    पांच लिंकों का आनंदhttps://www.halchalwith5links.blogspot.com पर...
    आप भी इस चर्चा में सादर आमंत्रित हैं...
    आप की प्रतीक्षा रहेगी...

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  5. वाह !सुंदर ख़्याल,
    दूसरों के दुःख में बेचैन
    सुख में उनके आत्मविभोर
    यही है ज़िंदगी।

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